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आरज़ू से कामयाबी
जब मन में हो आरज़ू, तो आरज़ू का ऊर्जा साथ रहे। जिससे हर पथ हम चलते चलें, खुशियों को जीवन में लाते चलें। हर मुश्किल आसान लगने लगे, आगे �
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याद जब जब आए
याद जब--जब आए उनकी, मन ये बड़ा बावला हो जाता है। धड़कन भी मस्त सुरों में धड़कती है, आंखों वह खूबसूरत तस्वीर आती है। कभी हम दोनों एक साथ,
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प्यार में सब जायज
जब प्यार किया तो डरना क्या, इसे कबूल सरेआम है करना। प्यार की चाहत जो भी हो, पूरा करना लाज़मी है। चाहे चांद_सितारे ही, क्यों न लाना पड़�
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बरसात और जुकाम
जब नहीं आ रही थी बरसात, तब तो बहुत ही इंतजार था। जब आ गई अपने रूप में, होने लगी घमासान वारिश। पानी ही पानी छा गई चारों तरफ, लोग_बाग सब तर
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खोटी किस्मत
खोटी किस्मत हुई दीन की, श्रम करता दिन रात। आता है उसके घर बस दुख,जैसे हो सौगात। उलटा कुदरत का लगता है,होता है कानून-- उसको सब सुविधा
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बैसाखी पर
बैसाखी पर चलने वाले मद में झूम रहे हैं। स्वारथ के ताने बाने बुन हर पग चूम रहे हैं। नेपथ्यों से लक्ष्य साधते कंधे बदल बदल कर-- संबंधों क�
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भगवान है हमारे माता - पिता 🙏
माता होती हैं जन्मदाता, पिता होते हैं हमारे विधाता। इसलिए तो कहते हैं, भगवान है हमारे माता-पिता।। माता-पिता के चरणों के धूल, कहीं उन्
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नजर को
नज़र को नज़र की नज़र न लगे। कोई अच्छा भी इस कदर न लगे। तुझे देखा है उस नज़र से मैंने-- जिस नज़र से तुझे नज़र न लगे।। (स्वरचित म�
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बचपन का प्यार सफर
कितना आसान सा सफर है बचपन प्यार दुलार से भरा हुआ लड़कपन न किसी की फिकर न कोई डर बचपन होता है सबसे बेखबर।। खेलना कूदना मस्ती बहुत करना
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बेच दिया ईमान
उसका कोई रूप नहीं है, बेच दिया ईमान । खाना पीना मस्ती करना,खोले व्यर्थ जुबान । काबू मन पर रहा नहीं है,रहा नहीं है फर्ज- जैसे बिन पे
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खुद को समझ लेना कभी
स्त्री के मन को समझ लेना कभी अंतरात्मा की उथल पुथल को भी सुन लेना कभी इतना भी कठिन नहीं होता स्वयं को समझना फुरसत मिले तो खुद को समझ ले�
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पंचामृत
॥ पावन पंचामृत ॥ क्षीर-सिंधु सा सुश्वेत, दूध पावनता का हेतु, भक्ति का बढ़ाता सेतु, आत्म-तृप्ति-दाता है। दही की सुघड़ता से, जीवन में स्थि�
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