मैं तपती हुई रेत की प्यास हूँ...!
पर जब आँखों से छलकूं तो ,
ऐहसास ख़ास हूँ.....!
मैं गहरी नींद का सुकुन भी हूँ ,
और जागती आस भी....
टूटकर जो बिखर � read more >>
भगत सिंह आज अगर हमें देखते होंगे,
हमें देखकर वह यही सोचते होंगे,
क्या हो गई है मेरे देश की हालत ?
क्यों फैली है हर ओर जेहालत?
बट गया है मु read more >>