[email protected]
Join Us:
Home
Category
कहानियाँ
कविताएँ
ग़ज़ल
गीत
शायरी
आलेख
महत्वपूर्ण सूचनाएँ
Topic
धार्मिक
राजनितिक
प्यार-महोब्बत
हास्य-व्यंग
बाल-साहित्य
समाजिक
देश-प्रेम
दुःखद
साहित्य लाइव सूचनाएँ
अन्य
Videos
Others
Search Articles
Latest Updates
Popular Articles
Testimonials
Video Tutorials
Winner List
How to publish articles
My Account
Login
Register New Account
Forgot Password
Login
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक
20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका
साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस
साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
कविताएँ
Home
Category
कविताएँ
करते नहीं विचार जो-उल्टे सीधे काम से
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" करते नहीं विचार जो,उसे बुद्धि है भ्रष्ट। उल्टे सीधे काम से,करे प्रगति को नष्ट। और गँवा�
read more >>
अपने को जो मानते-करता दृढ़ किरदार
#विधा:-मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपने को जो मानते,लगते हैं दिलदार। ऐसा दिल अब है लगा,करता दृढ़ किरदार। ऐसे दृढ़ किरदा�
read more >>
माया जोड़ी रात दिन-सबल किया परिवार को
#विधा:- मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया जोड़ी रात दिन,लिया बहुत ही दर्द। सबल किया परिवार को,बना रहा दृढ़ मर्द। हँसकर आगे को
read more >>
जलता दीपक आस का-हृदय चाहता खास
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जलता दीपक आस का,हृदय चाहता खास। लब से निकले प्रेम ही,मिटे सभी की प्यास। सफल भव्य किरदार स
read more >>
प्रेमश्वर की भक्ति में-जीवन करें निसार
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" प्रेमश्वर की भक्ति में,जीवन करें निसार। जीवन होगा तब सफल,सुखी रहे परिवार। चले वंश तब वृ�
read more >>
औजार-जिसके सहारे बना दूं कोई नवीन किस्सा
औजार को भी बना लूं अपना हिस्सा, जिसके सहारे बना दूं कोई नवीन किस्सा। जिसे सुनकर लोगों में खूब जोश जगे, फिर हर मुश्किल आसान ही आसान लगे।
read more >>
काटे कटी न रात अब-आँखों में है नूर
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" काटे कटी न रात अब,आँखों में है नूर। कदमों में है जोश अति,खुद पे करूं गुरूर। परचम अपना ही उ�
read more >>
तेरी क्या औकात है-पहने हुए नकाब
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरी क्या औकात है,पहने हुए नकाब। बातें भी बेकार है,रखता नहीं जवाब। मैं तो हूं अब शेर दृढ�
read more >>
जीना है तो सीख ले-श्रम करना ओ यार
विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जीना है तो सीख ले,श्रम करना ओ यार। मिले मेहनत से खुशी,छोड़ो मत अधिकार। करें यहां निर्माण,�
read more >>
उजला तन किस काम का-काला जब हो सोच
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" उजला तन किस काम का,काला जब हो सोच। ऐसे जन सब ही यहाँ,करते रहते नोच।। उजला तन किस काम का,जिसक
read more >>
रहस्य-दिव्य सुन्दरी जिसे देखते ही खुशी होता था
उसका आना और जाना मेरे लिए कौतूहक था, दिव्य सुन्दरी जिसे देखते ही खुशी होता था। बहुत ही रहस्यमय लग रही थी वो, पूरी शरीर में एक मादकता भर
read more >>
रात का दर्पण-चंचल चांदनी है जगमगाते तारें
चंचल _चांदनी है,जगमगाते तारें , महकी रात है। आंखों में आनंद की रौशनी है, लब पर मधुर गीत के बोल हैं। सफ़ेद आसमान यूं देख रहें हैं, जैसे उ�
read more >>
« Previous
Next »
Showing
1573
to
1584
of
6966
results
‹
1
2
...
129
130
131
132
133
134
135
...
580
581
›
Join Us:
© 2026 |
Sahity Live
®
| All Right Reserved.
A product of
DishaLive™ Group
| Digital Partner:
MyDL.in Website Builder