#विधा:_दोहा छंद
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार।
और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।।
मन से मन को मेल क� read more >>
क्षण भंगूर सा है ये मानुस,
दर्पण की तरह बिखर जाये,
मन मे ले जब दृढ- संकल्प,
हीरे की जैसे निखर जाये,
फिर भी ना जाने मुझे यहाँ,
भांति भांति � read more >>
तेरे बिना जी ना सकी
मर कर भी मर ना सकी
भटकती हूं मैं अब देखो
दर - दर कहीं
कैसे कहूं क्या मैं कहूं
बिन कहे भी चुप ना रहूं
सोचती हूं कि आज क read more >>