#विधा:_मुक्तक छंद
#मात्रा भार:_22(11मात्रा पर यति)
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
लालच जो मैं किया, बुरा हुआ तब हाल।
छूटा सब दोस्त है,गड़बड़ है read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद
#मात्रा:_21(08/13 पर यति)
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
कुछ तो उलफत, कर यार मुझ गरीब पर।
आ जाओ तुम, जान दिल के करीब पर।
फिर तुम ग� read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद
#कुल 28 मात्रा।14 मात्रा पर यति
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
खुद पर कर एतबार मैं, खुशियों से जीवन जीता।
हर हाल में भी मैं � read more >>
*नदी और किनारे*
नदी बन तुम कुछ इस तरह बह जाते,
हम तुम दोनों किनारों में सिमट जाते,
साथ रहेगा हमेशा पर कभी मिल पाते,
किनारे-किनारे पता नही� read more >>