मेरे लिखने से क्या
तुम पढ़ो तो कोई बात बने..
मेरे सोचने से क्या
तुम समझो तो कोई बात बने...
मेरे चाहने से क्या
तुम एहसास करो तो कोई बात बने. read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद
#मात्रा:_20 मात्रा पर आधारित मुक्तक छंद (09_ 11पर यति)
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
जुल्फ़ तुम्हारी, शंकर की जटा है।
अदा तुम� read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद
#मात्रा भार:_22(11मात्रा पर यति)
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
लालच जो मैं किया, बुरा हुआ तब हाल।
छूटा सब दोस्त है,गड़बड़ है read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद
#मात्रा:_21(08/13 पर यति)
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
कुछ तो उलफत, कर यार मुझ गरीब पर।
आ जाओ तुम, जान दिल के करीब पर।
फिर तुम ग� read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद
#कुल 28 मात्रा।14 मात्रा पर यति
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
खुद पर कर एतबार मैं, खुशियों से जीवन जीता।
हर हाल में भी मैं � read more >>