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मैं वही दीप हूॅं मैं दीप वही,जो कल जलता था हर एक घर में कोने-कोने मुझे सजाया था हर कोई एक पंक्ति में एक कतार में अपने ही हाथों से मुझको read more >>
जीवन का .... शुरू ,सफर अब है ...... पहला कदम, पहली ड़गर .... अब है सिख रहे है। चलाना ,योही ... गिरते संभलते । नजरों के आगे ,जब अपनी माँ रहती है। चले। read more >>
आज संगम करेंगे विचारों का, आज संगम करेंगे कर्मों का। आज संगम करेंगे संस्कारों का, आज संगम करेंगे सभ्यता का। आज संगम है आरजू ओं का, read more >>
In halls of power, a game unfolds, Where tales of politics, their grip, it holds. Ideas clash, like thunder's roar, Ambitions rise on a shifting floor. Debates echo, a cacophony of voices, In the realm of choices, where power rejoices. A dance of interests, a complex ballet, In the political theater, where actors play. Promises woven in read more >>
ना अब कोई सीता है ना लक्ष्मण जैसा भाई बचा ना‌ सत्युग जैसा राम कोई पर रावण बन बैठे हैं आज सभी अपना परिवार भी पराया अब तो यहाँ हो गया इ� read more >>
सामाजिक छल - F-58 हूँ धन से गरीब, नहीं अन्न से गरीब, ना दिल से गरीब, गरीबी मेरी का यूं मजाक ना कर II हूँ हक हलाल का मालिक, दिल से जिया, खरी read more >>
हम अभ्यस्त हुए -59 शक्ति महिला, अरमान, फरमान, कर्ज दान ईमान सब त्रस्त हुए, रीत पुरानी, कुरीत जनानी, करें मन मानी, हम अस्त - व्यस्त हुए, चलत� read more >>
चलते चलते बात हुई, अधूरी नई वार्तालाप हुई, घर परिवार मिल कुछ बात हुई, व्यस्तता चलते आधी रात हुई, फिर भी कहाँ पूरी बात हुई ? चाहत मिलना ब� read more >>
आज दिवाली है-आज दिवाली है, चारों और दीये ही दीये जलेंगे। काली रात भी आज जगमगायेगी, खुद पे बहुत ही इतरायेगी। दीपों की मनोहर शृंखला ल� read more >>
मेरे लिखने से क्या तुम पढ़ो तो कोई बात बने.. मेरे सोचने से क्या तुम समझो तो कोई बात बने... मेरे चाहने से क्या तुम एहसास करो तो कोई बात बने. read more >>
रावण जैसा भक्त ना कोई महाकाल के गुणगान गाता था धरती भी जिसके डर से कापे वो महाकाल का भक्ति कहलाता था मुट्ठी में नौ ग्रह हो जिसके देव� read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #मात्रा:_20 मात्रा पर आधारित मुक्तक छंद (09_ 11पर यति) #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जुल्फ़ तुम्हारी, शंकर की जटा है। अदा तुम� read more >>
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