नारी देश की उज्जवल है
नर देश के रच्क्षक l
कभी नहीं झुकने देंगीँँ
अपने देश का मस्तक ll
अरमाँँनो को पुरा करती l
मिट्टी की वो लाज बचाती ll
घर read more >>
अन्जान नदी की नावेँंl
ना जाने कहाँ से आये ll
हिलते-डुलते पानी में चलता l
मेरे मन को भाये ll
अन्जान नदीँं .....
जो भी बैठा उस नावँं पर
खुद से प� read more >>