(मुक्तक छंद)
समानता के नाम पर कुछ लोग धोखा दे रहा है।
इसके पीछे सच्चाई का ही गला रेत रहा है।
जो दरार थी ये ठग उसको और है बड़ा कर दिया_
भोल� read more >>
(मुक्तक छंद)
लोगों ने खुद से खुद के लिए कांटे दार तार लगा लिए।
शिकवा_शिकायत कर खाली नफरत के ये सब बीज बो लिए।
फिर भी ये सब लोग अनजान हैं म� read more >>
कौन सा पन्ना दर्ज हैं ,
कौन सा है फटा,
पढ़ ना ही पा रही हूं,
या भाषा है जुदा,
कौन सा हैं पन्ना ,
कौन सा हैं अध्याय,
अधूरी है किताब,
कुछ पन्ने read more >>
दहेज की फैली है चिंगारी,
लग रही हैं घर में आग,
जल रही हैं नारी,
झूठी शान दिखावे में,
नारी करें बलिदान,
ना दे पाये कोई दहेज,
नारी का करें अ� read more >>
मृत्यु
मृत्यु से क्यू डरता है, एक न एक दिन तो आना है
हर पल ऐसे जिओ जैसे अभी चले जाना है
जो करना है तुरंत करलो
क्या रक्खा है इस जीवन मे
कौ� read more >>