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कविताएँ
बिगड़ रहा पर्यावरण-भौतिक सुख में लीन
(दोहा छंद) बिगड़ रहा पर्यावरण, फुर्सत में आवाम। अपने अपने शौक में, खत्म किए गुलफाम।। बिगड़ रहा पर्यावरण,भौतिक सुख में लीन। छनिक भोग म�
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पाना है तुमको अगर-खुशियाँ भरी बहार
(दोहा छंद) पाना है तुमको अगर, यहां सफल किरदार। होगा सब गुण सीखना, करें पार मझधार।। पाना है तुमको अगर,खुशियाँ भरी बहार। निर्मल रखें वि�
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आशा के आकाश पर-दुनिया में है रंग
(दोहा छंद) आशा के आकाश पर, दुनिया में है रंग। और निराशा है जहां, बिगड़े उनके ढंग।। आशा के आकाश पर, ही मिलते हैं चाँद। फिर रहती है चाँदनी,�
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मनमानी है हर जगह-चौपट हुआ विकास
(दोहा छंद) मनमानी है हर जगह, लालच सबके पास। टूटे बांध विकास के,चौपट हुआ विकास।। टूटे बांध विकास के,घोर निराशा आज। अफरातफरी हर जगह,रूक �
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टूटे बांध विकास का-हुए नागरिक मूक
(दोहा छंद) टूटे बांध विकास के,हुए नागरिक मूक। राम भरोसे चल रहा,दिखे नहीं निज चूक।। टूटे बांध विकास के,छाए बादल भ्रष्ट। जनता में अति छो
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मन में सुरभित शांति हो-मिल जाए अरु ज्ञान
(दोहा छंद) मन में सुरभित शांति हो, जीवन में हो ओज। पता नहीं किस मोड़ पर,पूर्ण सभी हो खोज।। पता नहीं किस मोड़ पर,मिल जाए अरु ज्ञान। जन्म �
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सभी शोहरत पास हो-रहे मजबूत हाथ
(दोहा छंद) सभी शोहरत पास हो,रहे मजबूत हाथ। पता नहीं किस मोड़ पर,किस्मत दे दे साथ।। पता नहीं किस मोड़ पर,पूर्ण सभी हो खोज। मन में सुरभित
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पता नहीं किस मोड़ पर-मिल जाए भगवान
(दोहा छंद) पता नहीं किस मोड़ पर,मिल जाए भगवान। सभी मनोरथ पूर्ण हों,देंगे शुभ वरदान।। पता नहीं किस मोड़ पर, हो जाए उद्धार। इसी आस में मै
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मिला फरेबी जन यहां-कुचले सबकी आस
(दोहा छंद) मिला फरेबी जन यहां,कुचले सबकी आस। झुलस रहा है आदमी,मिले न अब विश्वास।। झुलस रहा है आदमी,करे खुशी सरकार। लोगों में है वेदना,�
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जला दिया अरमान को-भूल गई अनुराग
(दोहा छंद) जला दिया अरमान को,भूल गई अनुराग। झुलस रहा है आदमी,महँगाई की आग।। जला झुलस रहा है आदमी,मिले न अब विश्वास। मिले फरेबी जन यहां,�
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झुलस रहा है आदमी- छलियों का है राज
(दोहा छंद) झुलस रहा है आदमी, छलियों का है राज। वादा झटपट तोड़ते, समझे खुद को बाज।। झुलस रहा है आदमी,मिलता है प्रतिघात। मन जाता है टूट तब
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मचल रही है वादियाँ-दामन में रख लाज
(दोहा छंद) मचल रही है वादि, दामन में रख लाज। कल किसने देखा यहां, जी लें खिल कर आज।। कल किसने देखा यहां,वर्तमान पर नाज। हंसते गाते रह यहा�
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