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कविताएँ
दुख के पत्ते गिर जाएंगे-सुख के नीर भी बरसेंगे
दुख के पत्ते गिर जाएंगे सुख के नीर भी बरसेंगे जाने वह कौन घड़ी होगी दोनों एक नए होंगे। हारे मन को बांध रही हूं तुममें इनको साध रही हू�
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मेरे मन को बांधों तो-अपने ही पंचम स्वर में
अरे अधीर हो हमें सहर्ष स्वीकार हो तो। तुम्हें मिलेंगी मेरे पथ से नई उमंगे चितवन की इस नई चाह से मेरे मन में झांको तो। मुझ में ही तो बां
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विश्व का मान है-मेरा देश महान है
मेरा देश महान है विश्व का मान है, अब के समय में खूब धनवान है। विभिन्नताओं में भी एकता है, अलग_अलग रंग_रूप भी है। यहां के लोगों में जज़�
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तेरे गोद में सोना चाहती हूं मां
बस बहुत हो गया भागम भाग अब कुछ देर ठहरना चाहती हूं थक चुकी हूं मां अब तेरे गोद में सोना चाहती हूं मां मुझे कहीं छुपा ले हो सके तो जमान�
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नन्हा पौधा लगाओ-ज़मीं को सजाओ
नन्हा पौधा लगाओ, ज़मीं को सजाओ, हरी भरी धरती, पेड़ पौधें लगाओ, बड़े होकर देंगे छाया, देते हैं फल, ऑक्सीजन, देते हैं जीवन दान, पर्यावरण क�
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सदा लक्ष्य हो प्रगति का-रखता हूं मैं ध्यान
(दोहा छंद) सदा लक्ष्य हो प्रगति का,रखता हूं मैं ध्यान। करता अथक प्रयास मैं, बढ़ता मेरा ज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिल�
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लोगों में भगवान हैं-दिखते सब में राम
(दोहा छंद) यश अर्जित करना सदा, मेरा पहला काम। लोगों में भगवान हैं,दिखते सब में राम।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप�
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मनुज जन्म अनमोल है-सुरभित कर यह वंश
(दोहा छंद) मानव जीवन सत्य का, स्वच्छ प्यार का अंश। मनुज जन्म अनमोल है,सुरभित कर यह वंश।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्�
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कुछ नव पाने के लिए-करें त्याग आराम
(दोहा छंद) कुछ नव पाने के लिए, करें त्याग आराम। मंजिल पर रख ध्यान को,मिलता सत्य मुकाम।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त�
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रहें साफ दृढ़ वास्तविक-जिएं न्याय के साथ
(दोहा छंद) रहें साफ दृढ़ वास्तविक, जिएं न्याय के साथ। कर खंडन अन्याय का, लें यश अपने हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस
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जीते वर्ष भर नहीं हुए- क्षेत्र भी आना भूल रहे हो
(मुक्तक छंद) नेता बन के भाषण दे रहे हो वादा भी कर रहे हो। पहन के सफेद कुर्ता पजामा सबको ही लुभा रहे हो। मौसम के तरह बदल जाओगे यह सत्य अब स�
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बरसे सावन झूम के-लाया दिव्य निखार
(दोहा छंद) बरसे सावन झूम के,लाया दिव्य निखार। पुरुष स्त्री सब सौम्य है, रग रग में है प्यार।। बरसे सावन झूम के,पानी में है जोश। भींग भीं�
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