बहुत हुआ है देर अब,अब तो आंखें खोल।
सूरज लाए दिवस नव,जो है अति अनमोल।।
नित्य बढ़े यह रोग अब, अब तो आंखें खोल।
मानवता पर घात है, हो जाएं स� read more >>
वो पत्थर भी किसी चट्टान से कम नहीं होते ।
जो किसी की तरक्की में बाधक होते | अगर आ जाए नदी अपने पर, तो बड़ी से बड़ी चट्टान में भी अपनी राह ब� read more >>
ये पृथ्वी बहुत बड़ा गृह (घर) है जिसके मालिक ईश्वर है इस पृथ्वी पर निवासरत सभी जीव किरायेदार है तेरे कर्म तेरी दौलत है | जैसी तेरी कर्म रू� read more >>