छोड़ना ही था तो आए क्यूँ थे... ??
जब छोड़ ही चुके, थे तो आये क्यूँ हो...??
आवाज मेरी कहीं मर सी गई थी बरसो पहले बहुत शांत रहती थी खुद को कहीं दफन� read more >>
ताउम्र जिस घरौंदे को ,
संवारने में निकाल दी ।
सब उड़ चले मुझे भी,
निकलने की सलाह दी।
जाओ..... सब के सब
मर्जी तुम्हारी,
आंखों में दिख रही
ख� read more >>
स्वरचित रचना--- दूर हो या पास..........
संदर्भ--- दोस्ती!
दूर हो या पास
दोस्त तेरा अहसास!
बस मेरे लिए खास!
तू सलामत है तो,
मुझमें सलामत है सांस!
� read more >>
स्वरचित रचना---जुबां खामोश कहती है!
संदर्भित- ( At the deep love)
जुबां खामोश कहती है,
कहीं तो कुछ तो ऐसा है!
गुम हुआ होश कहता है
कहीं तो कुछ तो ऐसा � read more >>
जब आंख खुली तो मां की गोदी का एक सहारा था,
उसका आंचल मुझको भूमंडल से प्यारा था ,
उसका स्तन पान किया तो मैंने जीवन पाया था,
मुझको बढ़ता दे� read more >>