शीर्षक (रह जाने दो।)
मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर)
रहने दो मेरे दिल कि बाते,
मेरे दिल में ही रह जाने दो।
उन्हें कुछ पल और मेरे साथ बितान� read more >>
*छत्तीसगढ़ी प्रतीकात्मक बालगीत*
*1- ( अटकन )*
अर्थ-
जीर्ण शरीर हुआ जीव जब भोजन उचित रूप से निगल तक नहीँ पाता अटकने लगता है--
*2- ( बटकन )*
अर्थ-
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प्रेम सु जिंदगी, प्रेम मे राम !
प्रेम ही जिंदगी के सब सुखों का नाम!!
मिले सतगुरु इतना !
प्रेम में रहे उतना!!
ऐसा भाग मेरा, सतगुरु मिले राम!
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लगता है निराश हो गया है,
कुछ तो वजह होगी?
खैर छोड़ो कोई बात नहीं।
लगता है कुछ ज्यादा ही,
मगरुर हो, नहीं तो,
तुम्हें भी पत्ता होता,
अब क्या read more >>