कभी तो याद आएगी ना तुम्हें मेरी
कैसे भूलोगी वो हमारा साथ
चंद दिन जो गुजारे थे हमने साथ
कैसे भूलोगी वो साथ
कभी तो याद आएगी ना तुम्हे� read more >>
हर घर की शान है
बुजुर्गो से ही हम बच्चो की पहचान है।
इनकी छवि जैसी होती है,
वैसे ही हमारा स्वरूप भी बनता है,
तभी तो लोग कहते है कि तू अपन� read more >>
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परिदे घर से निकले हैं,
ढूढने नए से निकलें हैं,
अपने झुझ के बीच में,
ढूढने अपना अभिमान,
थके हारे लगे रहते हैं,
पाने पूरा आसमां को read more >>