मन के द्वार एक दीप धंरु मैं!
हृदय के तम को दूर करुं मैं!!
हो उजियारा चहूं ओर,
तन को सरावोर करुं मैं!
अटरिया के कमूरे पर दीप धरुं में
आस वि read more >>
कल्पना करते हुए____________
प्रभु धनवंतरी जी को बुलाते हैं
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दीपावली आ गई,चलो मिलकर घर को सजाते हैं,
धन तेरस के दिन, प्रभु धनवंत� read more >>
आज की युवा पीढ़ी खुद को भूल रही है ।
प्रेम की झूठी परिभाषा में खुद को तोल रही है ।
निज जीवन के कर्तव्यों को भूल गई है ,मात पिता के बलिदानो � read more >>