एक दिन तो तुम भी "आजादी" का जश्नन
मनाते हो।
है, वतन के लिए "कुछ" करने की तमन्ना
तब, ही "तिरंगा" फहराते हो ।
चाहें तो, सरहद ,पे
चल read more >>
तेरी बाहों ,में सोने कि चाहत ने,
मुझे ,
सरहद, का सिपाही बना दिया ।
उस मिट्टी के लिए ,
मै मिट्टी हो गया,
जिस,
मिट्टी को तुम अपनी 'माँ' कहते ह read more >>
वो स्त्री है उसे पढ़ने दो, उसे बढ़ने दो.......
न मारो तुम कोख में उसे
वो स्त्री है. . . . . . . . . . . . .
शिक्षा का पाठ पढ़ने से रोको ना उसे को� read more >>