आते..जाते..राहों में
मैं अक्सर..देखता हूं
भीड़ का एक..मेला..!
और नज़र आता है..
हर..एक शख़्स...अकेला..!!
जिनके आंखों में....
चमकती रहती है...तनहाई read more >>
क्या कसूर था उस ननी जान
छीन लिया सब कुछ......
बडा दि उस लाचार की ओर नौ महीने की प्रसव पीड़ा
क्या कसूर था उस ननी जान
नहीं जानता वह क्या धर्म.. read more >>