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गांव की गलियां
मैं शहर में आके भूल न पाया गांव की वो कच्ची गलियां जो हल्की बारिश होने पर फिसलन से भर जाती थीं जो तेज धूप में जल के नन्हें पांव जलाती�
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दिशा पर कविता
कविता -दिशा कहां जा रहे हो? न ठौर न ठिकाना चले जा रहे हो कहां पर? बताना मंजिल कहां है? कहां पर है जाना? दिशा वह कौन है? किधर हो रवाना? पथि�
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मेंहदी पर कविता
कविता -मेहदी का रंग मेहंदी का रंग अपनों के संग लाती है अपनों में प्रेम का अनुबंध, खुद पिसती है घिसती है पत्थरों के बीच और महका जात�
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एकावली छंद "मनमीत"
किसी से, दिल लगा। रह गया, मैं ठगा।। हृदय में, खिल गयी। कोंपली, इक नयी।। मिला जब, मनमीत। जगी है, यह प्रीत।। आ गया, बदलाव। उत्तंग, है चाव।।
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चौपई छंद "चूहा बिल्ली"
(बाल कविता) म्याऊँ म्याऊँ के दे बोल। आँखें करके गोल मटोल।। बिल्ली रानी है बेहाल। चूहे की बन काल कराल।। घुमा घुमा कर अपनी पूँछ। ऊपर न
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गंग छंद "गंग धार"
गंग की धारा। सर्व अघ हारा।। शिव शीश सोहे। जगत जन मोहे।। पावनी गंगा। करे तन चंगा।। नदी वरदानी। सरित-पटरानी।। तट पे बसे हैं। तीरथ स�
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"अद्भुत सावन"
कविता "अद्भुत सावन" सावन मास बड़ा निराला। हां पल पल में घटाएं छाती।। थे बिन पानी मुरझाए चेहरे। कब धरती भी
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Acter
वो एक्टर जो दूसरों को नसीहतें देता था, एक दिन उसे भी पान-मसाले का एड मिल गया.
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Kabja
वो ग्रह जिस पर हमने अपने ख्वावों का घर बसाया था, उस पर भी कब्जें की होड़ शुरू हो गयी हैं.
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Thagi
हमारे प्यार में आखिरकार ठगी तो होनी ही थी, तुमने अपने माँ - बाप को ठगा था , मैनें अपने.
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भारत माँ पे अर्पित कर दूँ
मैं अपना जीवन भारत माँ पे अर्पित कर दूँ। हे बलिदानी लोग जहाँ के मैं अपना सारा जीवन वहां समर्पित कर दूँ। हौसले होते है स्वपनों से ऊँच
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कविता - आओ घर घर लहराये तिरंगा।
किसान मजदुर सब मिलकर संग। आओ घर घर लहराये तिरंगा। चारो तरफ छाये केशरिया लाल हरा। सारा दुनिया तो देखे नजारा। विभिन्न सांस्कृतिक एव�
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