टूटना क्या होता है,
ये उससे पूछो,
जो घर की चार दीवारो तक ही सिमट जाती है।
उड़ान उसे भी भरनी थी,
लेकिन वो परिवार, बच्चे, घर,
इनमें ही उलझ कर read more >>
# स्त्रियां ...
एक स्त्री ,
दूसरी स्त्री से ,
करती है बातें घंटों
घर में बने सब्जियों की
कुछ इस तरह ,
आज क्या बनाई है
या फिर ,
आज क्या बनाएं read more >>
# महुआ के फूल ...
आदिवासियों का ,
है यह जीवन मूल
खिलने लगे हैं ,
अब महुआ के फूल ...
तपिश बड़ी ,
झुलसाती
नहीं कहीं ,
कोई छईआं...!
इस मौसम ,
टप - ट� read more >>
पहन लेते है ज़ब ये वर्दी इस तन पर
तब हम हम नहीं रहते है,
जो रह चुनी है देश की खातिर
हम हर पल आगे रहते है,
छुट्टी लेकर आयी थी भाई की शादी की
फ़� read more >>
कविता और कवि ...
ये तो है ,
बिखरती चांदनी ,
गुनगुनाती रागनी ,
महकती बहती हवा ...!
किसी ने दर्द ,
किसी ने मरहम
किसी ने खुशी ,
किसी ने गम कहा ...!
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मस्ती सी छा जाती है
ज़ब दरवाजे पर घंटी बज जाती है,
आते है मेहमान सभी ज़ब
हम खुशी मे झूम गीत गाते है,
पानी देने के बहाने उनसे केले छीन ले जात read more >>