परखना है खुद को तुझे,
तो खुद की तलाश में जुट,
पाना है अपने आपको अगर,
तो अंधियारे में रोशनी बन उठ,
करने है ना सपने पूरे सभी,
करने हैं ना सपन read more >>
किसी ने क्या खुब कहा है जब तक कडकती धुप से हमारे पाव ना जले तब तक हम आपने कदम छाया कि ओर जल्दी जल्दी नही बढाते हैं, ठीक उसी प्रकार जब तक जि� read more >>
हो कोई भगीरथ, जो गंगा को धरा पर ला सके।
दीन- हीन शोषित नर जिसकी, निर्मल धारा में नहा सके।
भ्रष्टाचार के पेड़ को, जो नष्ट कर दे जड़ सहित।
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