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तमन्ना थी
तमन्ना थी तुम्हारे साथ की, तमन्ना थी तुमसे बात करने की, तमन्ना थी तुम्हारे साथ हर सुख दुःख बाटने की, तमन्ना थी तुम्हारे साथ जिंदगी �
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थोड़ी सी मोहलत मिले जिंदगी
तो हम भी पुरानी यादों में खोना चाहते है कल की फ़िक्र किसको है हम तो बस तेरा होना चाहते है फिर डूब जाना चाहते है उन्हीं पुरानी कश्तियो
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इन ख़ाली हाथों में
इन ख़ाली हाथों में लकीरें हो या ना हो इन खाली हाथो से हो तो किसी का भला हो जो किसी भूखे को रोटी दे जो किसी प्यासे को पानी दे जो किसी बे�
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मां
एक मां से बेटे ने जो ख़ून की बूंदे पायी हैं उसने हंसकर भारत मां पे ही लुटाई हैं। सरहद पर वो बेटा हर हाल में तैनात है ऐसी निष�
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कविता, बड़े भाग्य से आये हो जग में।
बड़े भाग्य से आये हो जग में। कर लो कुछ तुम अच्छा काम। दिल जीतने का रखो तुम मकसद। एक दिन जग करेगा सम्मान। जग जीतने आया सिकंदर। वह भी ख�
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कविता, -सबसे बड़ी समस्या बेरोजगार।
सबसे बड़ी समस्या बेरोजगार। कैसे करे युवक भविष्य का निमार्ण। उनके राह मे कितने विडम्बना भरा। आजीविका के लिए संघर्ष बडा़। जो नही पढ�
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साफ़ साफ़ कह दो
साफ़ साफ़ कह दो हमारे देश के हालात बदले वाले नहीं साफ साफ कह दो क्यों इतना घुमाते हो क्यों अपनी रणनीति में हमें फसते हो क्यों झूठे �
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दुख सुख लगा रहेगा साथी
दुख सुख लगा रहेगा साथी तुम मेरे साथ रहो तो हर दुख सुख में बदल जाएगा मेरे साथी तुम जो पास रहो मेरे तो हर पल अनमोल सा लगता मेरे साथी तुम जो
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हे स्त्री ये दुनियां तुम्हारे लिए नहीं है
तुम्हारे लिए नहीं है हे स्त्री ये दुनिया तुम्हारे लिए नहीं है और ना ही महफूज है ये दुनिया तुम्हारे लिए आए दिन हर जगह दुष्कर्म होता �
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मैं प्रेम में पागल था
मैं प्रेम में पागल था नादान था लाचार था इस जीवन में क्या होगा कौन जानता है ? इस रहस्य से अनजान था ; हुआ तो सूरज की लाली पक्षियों का क�
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हार की जीत
स्वतंत्र चिड़िया ही बनाती है घोंसला बंद पिंजरे में तो बंद हो जाती है हौसला हारी कटी पतंग समझते हैं जिसको असर में स्वतंत्र उड़ चली मन�
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ये मेरा हक है
बड़े प्यार से, मां के गोद में, बैठे बैठे पूछा गीले बिस्तर पर क्यों सोती मुझे सुलाती सूखा तीखा तीखा लात मरता तुझको लगता मीठा खाना खाती म
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