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पुस्तक
पुस्तक पुस्तक होती दीपक समान जीवन को रोशन कर देती पुस्तक होती मित्र समान जीवन में उमंग भर देती पुस्तक होती इत्र समान जीवन में सुग�
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मेरी मां
21 मेरी मां प्यारी मां नहीं है तुझसा कोई मेरी मां तेरी सूरत है कितनी भोली भर दे ममता से मेरी झोली जग से न्यारी तेरी बोली सो जाऊं सुनकर त
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चल रहे है देखो हम
इन जंजीरों को तोड़कर रुख हवा का मोड़कर चल रहे हैं देखो हम गर्दिशों को छोड़कर कारवां को मोड़कर चल रहे हैं देखो हम पंख हवा में खोलकर बेड�
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मेरी बगिया
प्यारे बच्चे मेरी बगिया के ये फूल प्यारे प्यारे रंग बिरंगे सुंदर सलोने हर एक में है एक अलग रंग हर एक में है एक अलग उमंग सबको बस एक ही अ�
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आओ शिक्षा के दीप जलाएं
24 शिक्षा आओ शिक्षा के दीप जलाएं हम सब मिलकर पढ़े पढ़ाएं अंधियारे को दूर भगाएं हम सब मिलकर पढ़े और पढ़ाएं एक भी बच्चा छूटने न पा�
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जो छूटा
जो छूटा जहां उसको वही रहने दिया, सोचा नहीं जो हुआ उसे होने दिया; थम जाएं ऐसों से ख़ुद न मिलने दिया, समझाया खुद को न पैरवी करने दिया, अपना
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जो छूटा
जो छूटा जहां उसको वही रहने दिया, सोचा नहीं जो हुआ उसे होने दिया; थम जाएं ऐसों से ख़ुद न मिलने दिया, समझाया खुद को न पैरवी करने दिया, अपना
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टूटे हुए अक्स
टूटे हुए अक्स समेटने मैं चला, अपनी कहानी लिखने मैं चला, अकेले चलने का हुनर है मुझमें, अपने वजूद को समेटते मैं चला, माज़ी की यादों को पीछे
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ज़माने भर का
ज़माने भर का ग़म उठाए फिरते हो क्या रंज है जो छिपाए फिरते हो कभी तो आओ देहरी पर हमारे हर गम को भूल जाओगे शब से पहले गर मुस्कुराओगे तो ज�
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ढलती उम्र – एक एहसास
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ�
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ढलती उम्र – एक एहसास
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ�
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ढलती उम्र – एक एहसास
कभी जो कंधे दुनिया उठाया करते थे, आज खुद सहारे की तलाश में रहते हैं। जो कदम बेफिक्र हवाओं में उड़ते थे, अब हर मोड़ पर ठहरने लगते हैं। आ�
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