है बेबसी में लिपटी, मेरी ये जिंदगी है ।
आंखों में अश्रुजल फिर भी, होठों पे मेरे हंसी है।।
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अंधेरों read more >>
ऐ जीवन के थके मुसाफिर,
बढ़ चल मंजिल अब दूर नहीं ।
कर्म करे फल ना पाये,
ये प्रकृति का दस्तूर नहीं ॥
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ऐ जीवन के थके मुसाफिर,
बढ़ चल मंजिल अब दूर नहीं ।
कर्म करे फल ना पाये,
ये प्रकृति का दस्तूर नहीं ॥
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गढ़ की मान बचावन की खातिर,
सिर कटा लेगा देश को वीर,
अंगारों पर भी हसते हसते चल लेगा,
मारे गढ़ री तो एक ही शान |
मुछ नहीं रखी मर्द कैसा,
यह � read more >>
सफर सड़कों का,
जो सफर को आराम बना दे,
मंजिल को आसान बना दे,
सड़को से कुछ इस तरह रिश्ता हो,
जो कभी भुला न सके,
बस सफर है सड़कों का ||
इन रास� read more >>