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गाँव – मेरी जड़ों की खुशबू नंगे पाँव वो पगडंडी, अब भी रुला देती है, जहाँ बचपन ने कंचों की दुनिया रची थी। वो कच्चे मकान की मिट्टी, जो हाथ� read more >>
गाँव की गलियाँ, वो बचपन की बातें, माँ की ममता, दादी की सौगातें। बिलकुल कच्ची पर दिल से पक्की, वो मिट्टी की खुशबू, वो अमर बेल की लच्छी। त� read more >>
वो मिट्टी की सौंधी ख़ुशबू, वो खेतों की राहें, जहाँ हर सुबह उम्मीदों की किरणें हैं चाहें। नदी के किनारे वो रेत की बिछौनी, जहाँ बचपन ने ल� read more >>
आवाज है दिल की अब कुछ नया हो। तेरा मेरा सफर कुछ इस तरह बयां हो।। कोई सागर का मोती तू जैसे मै लहर बन किनारे लाऊं। अक्स तेरा यूँ जब चमके त read more >>
देख रहां हु समझ रहां हु , हर इक इंसान झुटा हैं। झूट फरेब हर कोई करता सच का बस मुखोटा हैं।। झूट झट से पकड़ में आता मन मंदिर में कोई तोलें त� read more >>
तेरी बेरुमहाई ने बक्शा मुझे , इस्तकाब कबूल कर। काबिज न थी तू इतनी भी की ,अपना लेता इतनी बड़ी भूल कर।। शायद किसी दूसरे के कर्म फूटने को हे� read more >>
नूतन जीवन सी कलियाँ चैत्र मास खिल जाती हे झड कर सारी पात पतैया नव रूप ले आती हे|| सूरज की चम् चम् में फिर नया ओज सा छाया हे धूमिल तप्� read more >>
पल पल जीवन खत्म हो रहा तू क्यो करता फिर तेरी मेरी। चंद साँसों का जीवन घट में पता न कोनसी रात निबेरी ।।   आहत होंगे रिश्ते नाते सब धरा य read more >>
मंजिले अभी मिली नही,अभी कई सफर बाकी है अपने सपने सजोने में,अभी कई डगर बाकी है..... चलना ही जिंदगी है तेरी,ज़रा हाथ थामे चलना मिलजाय हुस्न त� read more >>
तु प्रयास कर, अगर गिर जाए, तो उठ। नई फिर से शुरुआत कर, तु प्रयास कर......।। तुम इस जमीन पर आया है, कई बातों से लड़कर, ना ही वक्त बर्बाद कर, नई read more >>
चले लागी पिया फागुनी ब्यारिया , खेतावन में हरे हरे लहके फसलिया । पियर पियर सरसों के फूलवा मन होये , मन मोहे पिया फागुनी बयारिया read more >>
असीम सागर सी भावनाओं के संग बहकर जाने कहाँ आ पहुंचा हूँ दूर तलक बस खालीपन वीराना है और फैला है हर ओर घना अँधेरा यूँ तो चला था मैं कारवा read more >>
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