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दर्द

Archana Singh 30 May 2026 कविताएँ दुःखद दर्द 6514 0 Hindi :: हिंदी

" दर्द "

शब्दों में ना लिख पाऊं तेरी कमी को ...
तेरे बिना अधूरा सा लगता हैं जिंदगी को !
लोगों को लगता हैं ,मैं मजबूत बन गई और...
 मैं अपने आंसू छुपाते-छुपाते थक गई  !
मजबूत होना भी नुकसान दे गया , और ...
लोगों को मेरी तकलीफ़ पर एक चर्चा मिल गया !
जब अपनों ने साथ छोड़ा तो ...
 मैंने भी भ्रम में जीना छोड़ दिया !
रिश्तो का मांझा अब कमजोर पड़ गया ,और ...
तेरे ही जोड़ें रिश्ते , मुझे अंदर से तोड़ गया !
 हर दर्द की इकलौती गवाह बन गई, और...
 अपनी प्रवीणता से आगे बढ़ती चली गई...!!
स्वरचित: अर्चना सिंह ✍🏻

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