सावन आया बादल छाए,
धरती पर खुशहाली लाये /
हरियाली की चादर ओढे,
पौधों ने अब ली अंगड़ाई /
बागों में अब झूले पड़ गए,
खेतों में अब मोर नाचे /
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(मुक्तक छंद)
01
जिन्दगी को मैंने इस कदर देखा जिन्दगी मुझ में डूब गई।
मेरी हर चाहत को पूरा करने के लिए मुझ में डूब गई।
अब आलम यह है कि सारी read more >>