[email protected]
Join Us:
Home
Category
कहानियाँ
कविताएँ
ग़ज़ल
गीत
शायरी
आलेख
महत्वपूर्ण सूचनाएँ
Topic
धार्मिक
राजनितिक
प्यार-महोब्बत
हास्य-व्यंग
बाल-साहित्य
समाजिक
देश-प्रेम
दुःखद
साहित्य लाइव सूचनाएँ
अन्य
Videos
Others
Search Articles
Latest Updates
Popular Articles
Testimonials
Video Tutorials
Winner List
How to publish articles
My Account
Login
Register New Account
Forgot Password
Login
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक
20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका
साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस
साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
शायरी
Home
Category
शायरी
अंदाज वही है-डरते तो हम कल भी नहीं थे
डरते तो हम कल भी नहीं थे और आज भी नहीं है बस कुछ जिम्मेदारियां हैं साहब वरना तो अंदाज वही है ज्योति यादव के कलम से ✍️
read more >>
मैं झुरनिया झारखंड की पठारण-मोरनी सम छमछम नाचूं गाऊं
मैं झुरनिया- झारखंड की हूं पठारण, मैं झुरनिया- मैं पठारी हूं पठारण,, मैं झुरनिया हूं- झाड़ियों की बुलबुल मैं, नाचूं- मैं गाऊं मोरनी �
read more >>
सबके कर्मों का अधिष्ठता साक्षी-चेतन वह सर्वज्ञ परमात्मा तुम्हारे स्वरूप में
प्राणियों में वह- रहे प्राण के रूप में, अंतर्यामी- जीवों में आत्मा रूप में,, सबके कर्मों का- अधिष्ठता साक्षी परमात्मा, चेतन वह- सर्�
read more >>
मैं गांव की बाला मेरी प्रीत गंवारण-जंगल दरिया तीर गंवारण
मैं गांव की- बाला मेरी प्रीत गंवारण, मैं कुकती- जंगल दरिया तीर गंवारण,, मैं संग-संग खेलती- हवाओं में मेरी चाल बयारण, मैं चली- रे चली मे
read more >>
आत्मज्ञान कर्म श्रेष्ठ-जिससे जीव भवनिधि के पार
आत्मज्ञान कर्म- श्रेष्ठ जानो हे भाई, जिससे जीव- भवनिधि पार होता भाई,, सद्गुरु बिन जग- में आत्मज्ञान मिले न भाई, राम-कृष्ण सम- बिन गुर
read more >>
जरूरतें-अब हमारी जरूरतें बढ़ गई हैं
"जरूरतें" "अब हमारी जरूरतें बढ़ गई हैं,इसलिए दौलत की गिरेबान खींचने की ताकत बढ़ गई है,अब शौक ऊंचे-ऊंचे पालेंगे,जमीन पर खड़े होकर आसमान क�
read more >>
चित् चेतन सब चेतन- बिन आत्मतत्व सब शून्य
चित् -चेतन सब चेतन, चित्-ए-शून्य बिन चेतन,, मन-बुद्धि-विवेक सब शून्य, बिन आत्म तत्व सब शून्य....!!!! -मोती
read more >>
उस सृजनात्मक शक्ति की ओर संकेत है- जिसके आधार खंड-ए-ब्रह्मांड खड़ा है
उस सृजनात्मक- शक्ति की ओर संकेत है, जिसके आधार- खंड-ए-ब्रह्मांड खड़ा है,, और यह जीव- जीवन परमाणु में रची-रमी है, यह सचखंड- यही से अनवरत
read more >>
कितने सवाल-तुम न जाने कितने सवाल करते हो
तुम न जाने कितने सवाल करते हो। हे जवाब सबके क्यों खुद को इतना बेताब करते हो। कहाँ से लाते हो सारे सवाल पर सारे सवाल तुम लाजवाब करते ह�
read more >>
दर्द को मात-दर्द भले कितना भी हो
आज थोडी पी है कल ज्यादा पीयेगे हम। दर्द भले कितना भी हो आज दर्द को मात देगे हम।
read more >>
दर्द-ना हो आराम थोडा दर्द का भी मजा लें
खवाब है तेरे तु उनको सजालें जिन्दगी जैसी भी तु उसका मजा लें। मर्ज हे कुछ भी तु उसकी दवा लें ना हो आराम, थोडा दर्द का भी मजा लें।
read more >>
बरकरार जग ना कोई जीव बारकरार- आखिरत की सजेगी ए-डोली सबकी
मेरी यह भूल- कि मैं रहूंगा बरकरार, बरकरार जग- ना कोई जीव बरकरार,, सोचा था- सजेगी बारात दूल्हा बनूंगा, पर आख़िरत- की सजेगी ए-डोली सबकी.
read more >>
« Previous
Next »
Showing
1261
to
1272
of
5252
results
‹
1
2
...
103
104
105
106
107
108
109
...
437
438
›
Join Us:
© 2026 |
Sahity Live
®
| All Right Reserved.
A product of
DishaLive™ Group
| Digital Partner:
MyDL.in Website Builder