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डरते तो हम कल भी नहीं थे और आज भी नहीं है बस कुछ जिम्मेदारियां हैं साहब वरना तो अंदाज वही है ज्योति यादव के कलम से ✍️ read more >>
मैं झुरनिया- झारखंड की हूं पठारण, मैं झुरनिया- मैं पठारी हूं पठारण,, मैं झुरनिया हूं- झाड़ियों की बुलबुल मैं, नाचूं- मैं गाऊं मोरनी � read more >>
प्राणियों में वह- रहे प्राण के रूप में, अंतर्यामी- जीवों में आत्मा रूप में,, सबके कर्मों का- अधिष्ठता साक्षी परमात्मा, चेतन वह- सर्� read more >>
मैं गांव की- बाला मेरी प्रीत गंवारण, मैं कुकती- जंगल दरिया तीर गंवारण,, मैं संग-संग खेलती- हवाओं में मेरी चाल बयारण, मैं चली- रे चली मे read more >>
आत्मज्ञान कर्म- श्रेष्ठ जानो हे भाई, जिससे जीव- भवनिधि पार होता भाई,, सद्गुरु बिन जग- में आत्मज्ञान मिले न भाई, राम-कृष्ण सम- बिन गुर read more >>
"जरूरतें" "अब हमारी जरूरतें बढ़ गई हैं,इसलिए दौलत की गिरेबान खींचने की ताकत बढ़ गई है,अब शौक ऊंचे-ऊंचे पालेंगे,जमीन पर खड़े होकर आसमान क� read more >>
चित् -चेतन सब चेतन, चित्-ए-शून्य बिन चेतन,, मन-बुद्धि-विवेक सब शून्य, बिन आत्म तत्व सब शून्य....!!!! -मोती read more >>
उस सृजनात्मक- शक्ति की ओर संकेत है, जिसके आधार- खंड-ए-ब्रह्मांड खड़ा है,, और यह जीव- जीवन परमाणु में रची-रमी है, यह सचखंड- यही से अनवरत read more >>
तुम न जाने कितने सवाल करते हो। हे जवाब सबके क्यों खुद को इतना बेताब करते हो। कहाँ से लाते हो सारे सवाल पर सारे सवाल तुम लाजवाब करते ह� read more >>
आज थोडी पी है कल ज्यादा पीयेगे हम। दर्द भले कितना भी हो आज दर्द को मात देगे हम। read more >>
खवाब है तेरे तु उनको सजालें जिन्दगी जैसी भी तु उसका मजा लें। मर्ज हे कुछ भी तु उसकी दवा लें ना हो आराम, थोडा दर्द का भी मजा लें। read more >>
मेरी यह भूल- कि मैं रहूंगा बरकरार, बरकरार जग- ना कोई जीव बरकरार,, सोचा था- सजेगी बारात दूल्हा बनूंगा, पर आख़िरत- की सजेगी ए-डोली सबकी. read more >>
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