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यह छोटा नागपुर खनिज संपदा से भरपूर-आंचरा में है समृद्ध झारखंड
यह छोटा नागपुर- खनिज संपदा से, भरल झारखंड है आंचरा में ,, कल-कल- नदी बहेला पहाड़े झरे, झरना झारखंड कर आंचरा में,, बोली हमर- आऊ-जाऊ सबे रह�
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तेरे इर्द - गिर्द कितने है-तू क्या मुझे याद रखेगा
तेरे इर्द - गिर्द कितने है तू क्या मुझे याद रखेगा जानती थी मैं कि हर बार झूठा बहाना बनाके तू मुझको ही लूटेगा धन्यवाद
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ना दर्द का ठिकाना-ना चोट का हिसाब
ना दर्द का ठिकाना ना चोट का हिसाब अरे, ओ हरजाई जब निभाना ना था साथ तो वफा का ख़्वाब दिखाया क्यों धन्यवाद
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अक्सर मोहब्बत में यही होता है
अक्सर मोहब्बत में यही होता है दिल जिसको बेहद चाहता है वही फरेबी होता है धन्यवाद
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किस मोड़ पर लाकर छोड़े हो-जहां से ना कोई राह ना कोई मंजिल
किस मोड़ पर लाकर छोड़े हो जहां से ना कोई राह ,ना कोई मंजिल नजर आती है आती है नजर,तो सिर्फ तेरी बेवफाई याद आती है धन्यवाद
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तुमसे जुदा होकर-इतना दर्द सहना होगा
सोचा ना था तुमसे जुदा होकर इतना दर्द सहना होगा दिल तो टूटा,साथ में हमें भी टूटना होगा धन्यवाद
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निर्मल चित् बसे भगवाना-धारण कर हंस का सुंदर बाना
बार-बार जल- में डुबकी के पश्चात्, गांदी वस्तु ही खाता ए-कागा लोग जल स्नान- को पवित्रता मान निरंतर, विषयों में बसें जस ए-कागा यदि कामन�
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कह ना पाये-कहने का मौका तो दिया था तुने मगर
कहने का मौका तो दिया था तुने मगर हम कुछ कह ना पाये। ये उलक्षन है अपनी ही अब किसे क्या समझाये। कहना था तुमसे बहुत कुछ अफसोस हम कुछ कह ना�
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अंदाज वही है-डरते तो हम कल भी नहीं थे
डरते तो हम कल भी नहीं थे और आज भी नहीं है बस कुछ जिम्मेदारियां हैं साहब वरना तो अंदाज वही है ज्योति यादव के कलम से ✍️
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मैं झुरनिया झारखंड की पठारण-मोरनी सम छमछम नाचूं गाऊं
मैं झुरनिया- झारखंड की हूं पठारण, मैं झुरनिया- मैं पठारी हूं पठारण,, मैं झुरनिया हूं- झाड़ियों की बुलबुल मैं, नाचूं- मैं गाऊं मोरनी �
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सबके कर्मों का अधिष्ठता साक्षी-चेतन वह सर्वज्ञ परमात्मा तुम्हारे स्वरूप में
प्राणियों में वह- रहे प्राण के रूप में, अंतर्यामी- जीवों में आत्मा रूप में,, सबके कर्मों का- अधिष्ठता साक्षी परमात्मा, चेतन वह- सर्�
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मैं गांव की बाला मेरी प्रीत गंवारण-जंगल दरिया तीर गंवारण
मैं गांव की- बाला मेरी प्रीत गंवारण, मैं कुकती- जंगल दरिया तीर गंवारण,, मैं संग-संग खेलती- हवाओं में मेरी चाल बयारण, मैं चली- रे चली मे
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