बातो से तेरी ,खुद से मिल पाई हूं!
खुद की लड़ाई खुद से जीत पाई हूं
अंधेरे को गले लगा पाई हूं,
ख़ुद की बेबशी से निकल पाई हूं!
खुल कर मुस्कु� read more >>
इक तलप लगी है तेरी, उसे बुझाऊ कैसे
इस बन्झर जमी पे, हरियाली लाऊ कैसे
सौ अरमानो को दबाकर, इक ख्वाईस् की है
उस दिलके ख्यालों को, हकीकत मे ब� read more >>