हवा से उडती धूल हू मे,
शायरी की राह में एक भुल हू मे!
किसी की संसो मे ,कहियो की आँखो मे,
उडती एक धुल हू मे !
कारो के शिषे पर जमी धुल,
पर लिखती read more >>
जहर जिंदिगी का एक साल और कट रहा है,
है कोई जो हम से अलग बट रहा है।
वो दौलत लूटे मेरी तो क्या गम होता,
में फकीर हूं ये दुःख मुझे अंदर से चाट � read more >>