Manish Kumar Sharma 06 Jan 2025 आलेख समाजिक वृक्ष का महत्व,बनो पेड, मानव पेड़ के लिए अभिशाप, पेड़ मानव के लिए वरदान 27057 1 5 Hindi :: हिंदी
एक इंसान अपने लालच के लिए हद पार कर जाता है। संजीव होते हुए भी निर्जीव से भी बद्तर काम कर जाता है। एक पेड़ न संजीव न निर्जीव होते हुए भी दूसरों के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देता है। क्या पेड़ को अपनी रक्षा करने का भी अधिकार नहीं है, जो अपनी रक्षा करने के लिए अपने तन पर कांटे लगा ले। लेकिन मानव कांटेदार वाले पेड़ को या तो काट देता है या फिर उसे भला बुरा कहता है। जो पेड़ मानव के हित का होता है मानव उसे बड़े चाव से लगाता है, और कांटे वाले पेड़ के लिए मानव एक दानव का रूप ले लेता है। पेड़ मानव के लिए ऑक्सीजन ,फल, फूल ,लकड़ी ,छाया आदि चीजे देता है, पर मानव उस पेड़ को क्या देता है यह पूछता है पेड़? जब तक पेड़ फल देता है तब तक शायद मानव पेड़ को जल व खाद दे देता होगा वह भी अपने लालच के लिए, लेकिन जब पेड़ बुड्ढा हो जाता है और फल देना बंद कर देता है,तो मानव उस पेड़ को उखाड़ के फेंक देता है। क्या उस पेड़ को बुढ़ापे में जीने का कोई अधिकार नहीं है। क्या मानव अपने माता-पिता को भी बुढ़ापे में घर से बाहर फेंक देते हैं। पेड़ जीव जंतुओं व मानव के लिए अपने प्राण दाव पर लगा देता है, वह केवल प्राकृतिक तरीकों से ही अपना जीवन व्यतीत करता है। पेड़ यह जानते हुए भी की पहाड़ कितना कठोर हृदय वाला है, वहां पर भी उग कर मानव के लिए बलिदान देता रहता है। जहां पहाड़ पर पानी न होते हुए और तीखे किनारो के पत्थरों से कष्ट झेलकर ऐसे रहता है जैसे 32 दांतों के अंदर जीप रहती है। अरे मानव से अच्छा तो वह पहाड ही है जो कठोर हृदय का रहते हुए भी पेड़ को अपनी गोद में छुपा कर रखता है और उस पर ममत्व का भाव रखता है, और न जाने पेड़ के लिए कहां से पानी की व्यवस्था करता है।
1 year ago