Anilkumar Rathwa (Sameer) 23 Feb 2026 ग़ज़ल समाजिक #Google#motivationalpoetry# 10684 0 Hindi :: हिंदी
हवा के रुख को मोड़ने की अब कला सीख ले, तू चट्टानों को चीरने का नया हौसला सीख ले। नहीं मंज़ूर मुझे हार, यह सर कभी झुकेगा नहीं, तू तूफानों से टकराने का अब सिलसिला सीख ले। जो बुझ जाए हवाओं से, वो दीया और होगा, तू सूरज की तरह जलने का अब ज़लज़ला सीख ले। पसीना जो बहेगा तेरा, वो मोती बन के चमकेगा, तू रातों से लड़कर जीत का नया फ़लसफ़ा सीख ले। ज़मीं पर पाँव रख लेकिन नज़र को आसमाँ दे दे, तू अपनी मुट्ठियों में बंद करना ये जहाँ सीख ले।