Anilkumar Rathwa (Sameer) 01 Feb 2026 ग़ज़ल समाजिक “वक़्त का तोहफ़ा” 10665 0 Hindi :: हिंदी
समय बड़ा अनमोल है, इसे यूँ ही न गँवाओ तुम, बर्बाद भी करना हो तो, किसी ख़्वाब पे लुटाओ तुम। सिक्कों में नहीं तौला जाता, दिलों में बसता है वक़्त, किसी अपने की हँसी में, इसकी कीमत दिखाओ तुम। दौड़ते क़दमों की दुनिया में ठहरना भी एक कला है, किसी थकी हुई रूह को, दो पल का साया बनाओ तुम। जो बीत गया वो कहानी है, जो आएगा वो दुआ है, आज के इस लम्हे को ही, ज़िंदगी बनाओ तुम। "अनिल", समय की नदी में बहकर भी पहचान रखो, हर पल को इबादत समझो, हर साँस में खुद को पाओ तुम।