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Pratibha Khadekar 22 Jul 2026 गीत दुःखद प्रतिभा खडेकार 82 0 Hindi :: हिंदी

इस जमाने में...
                    प्रतिभा खडेकार 
                       7517947668
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इस जमाने में कद्र करने वाले की कीमत कहां होती है 
कोई दुआ दे इतनी ज़हन में मोहब्बत बाकी कहां होती है 
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मिट्टी समझ रौंदा जाता है जमाने में उन्हें 
दर्द बांटने वाले की यहां औकात कहां होती है 
बेदर्द हवाएं कदमों की धूल बना उड़ा देती है उन्हें 
बहते अक्ष किसी के पोंछने पर यहां
जमाने की फितरत है अक्ष पोंछने वालों की आंख फोड़ने की 
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न जाने यादें कितनी लंबी होती है 
चाह कर भी ना भुलाया जाए इतनी बेसब्र होती है 
वक्त भले ही लगा दे मलहम 
घाव भले ही दिखे भरा
दिल में यादें तो आज भी हरी होती है 
उसे पर कौन सा मलहम लगाऊ 
जो सुख जाए अंदर से न रोने दे हां अंदर से न रोने दे 
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महफिल में न जाने कितने परिंदे पर मर जाते हैं 
जालना आशिकी का आशियाना तो आशिक हि मार जाता है
ना हक जता ना फिक्र कर
इस जमाने में कद्र करने वाले की कीमत कहां होती है 
कोई दुआ दे इतनी ज़हन में मोहब्बत बाकी कहां होती है

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