संदीप कुमार सिंह 22 May 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 12721 0 Hindi :: हिंदी
लेखन ऐसा कीजिए,अनुपम हो आगाज। करे नाश पाखंड को,लोगों की आवाज।। लेखन ऐसा कीजिए,सब में हो उत्साह। शिक्षा सरल प्रसार हो,बहे ज्ञान की चाह।। लेखन ऐसा कीजिए,समझे सब जन यार। प्रेम करो सब देश से,आपस में हो प्यार।। लेखन ऐसा कीजिये,हो ज्वाला तैयार। गर्म लहू को यह करे,मिले जोश की धार।। लेखन ऐसा कीजिए,जिसमें दिव्य प्रभाव। लाए जो नव क्रांति को,भरे प्रेम का चाव।। संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....