संदीप कुमार सिंह 25 May 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 27167 0 Hindi :: हिंदी
उलझा है संसार,मोह माया में जनता। करते यहां तलाश,काम सबका है बनता।। सबको सबमें होड़,मेहनत से हो आगे। रहे सदा आनन्द, खुशी से सब दुख भागे।। उलझा है संसार,मौत सबकी है साथी। फिर भी सब तैयार,और समझे सब हाथी।। छोटों की क्या बात,निगल जाए तृण जैसे। खुद को करें बुलन्द,दीजिए उत्तर वैसे।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 ज़िला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....