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मेहनत का सिक्का..

Anilkumar Rathwa (Sameer) 06 Aug 2026 गीत अन्य मेहनत का सिक्का.. 3185 0 Hindi :: हिंदी

(वर्स 1 - रैप)
रातों की नींदें उड़ाकर, जो ख्वाब सजाए हैं,
वही तो आज दुनिया को राह दिखाते हैं।
पैरों में छाले हैं, पर रुकना नहीं,
मुश्किलों के आगे कभी झुकना नहीं!
किस्मत की लकीरें तो बदल देंगे खुद,
अपनी ही मेहनत से लिख देंगे युद्ध!
गिर के संभलना ही तो असली शान है,
जान लगा दे, यह पूरा जहान है!
​(कोरस)
उठ जाग अभी, तेरा वक्त यही है!
हर हार को जीतने की जिद अभी है!
लफ्जों में आग और हौसला बुलंद,
करेगा तू पूरा हर एक सपना सुहाना!
​(वर्स 2 - रैप)
लोग कहेंगे कि तू कर ना सकेगा,
तेरा यह जुनून ज्यादा चल ना सकेगा।
पर उनकी बातों को तू धूल बना दे,
अपनी ही सफलता से इतिहास रचा दे!
पंख नहीं, हौसलों से उड़ान भर तू,
अंधेरों को चीर के नया सूरज बन तू।
मेहनत का सिक्का अब चलेगा हर जगह,
मंजिल पे जाके ही रुकेगी अब यह फिजा!
​(कोरस)
उठ जाग अभी, तेरा वक्त यही है!
हर हार को जीतने की जिद अभी है!
लफ्जों में आग और हौसला बुलंद,
करेगा तू पूरा हर एक सपना सुहाना!
​(आउट्रो)
बोलो, रुकना है क्या?
(नहीं!)
झुकना है क्या?
(नहीं!)
जीतना है?
(हाँ!)
अब तो बस आगे बढ़ना है!

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