Nisha Kumari 01 Oct 2026 कहानियाँ समाजिक बेटियों का जीवन 2378 0 Hindi :: हिंदी
आधी उम्र साथ में चलकर थम जाते है कुछ कदम बढ़ाकर यूं तो अजनबी नहीं थे हम बेटियों से कभी गूँजता था घर आंगन।। कर देते हैं पराया कुछ पल में ही साथ छूट जाते हैं अपनो से भी कहते है बेटियां तो होती है परायी बेटियों की आह किसी को समझ न आयी।। अपना घर भी हो जाता है बेगाना सुना लगता है हर डगर हर कोना मान लेते हमे भी जो अपना बेटियों का भी होता अपना आशियाना।। बेगानो सा एहसास न होता अपना घर आंगन भी होता साथ सभी मिल हंसते गाते पूरा जीवन साथ बिताते।।