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सब्जीवाला का स्वाभिमान

नागमणि कुमार सिंह 10 Sep 2026 कहानियाँ समाजिक सब्जीवाला का स्वाभिमान 1318 0 Hindi :: हिंदी

कहानी 
					                                 शीर्षक:सब्जीवाला का स्वाभिमान 

		बात उस समय की है जब राम बिहार शरीफ में रहकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा था I राम एक साधारण किसान का बेटा है और उसका स्वभाव भी बहुत अच्छा है I वह बड़े को आदर देता है तो छोटे को प्यार करता हैं I गरीबों के प्रति उसके मन में बहुत प्यार एव आदर हैं I बिहार शरीफ में जिस जगह पर राम रहता हैं उसके बगल में कुछ उच्च परिवार के भी लोग रहते हैं I जिस मकान में राम रहता है उसके आगे के हिस्से में बैठने के लिए चबूतरा बना हुआ है I जिस पर बैठकर रोज छात्र एव आस-पड़ोस के लोग सुबह-शाम  में अखबार पढ़ना , खेलकूद की चर्चा करना और कभी कभी राजनीतिक चर्चा भी हो जाती थी I राम भी कभी-कभी उस चबूतरे पर बैठता था और चर्चा का हिस्सा बनता था I 

		एक दिन जब राम सुबह के समय चबूतरे पर बैठकर अखबार पढ़ रहा था I एक सब्जी बेचने वाला  उस रास्ते से गुजर रहा था Iउच्च परिवार के एक सज्जन आदमी ने सब्जी वाले को आवाज लगायी I सब्जीवाला रुक गया I सज्जन आदमी ने सब्जी देखने लगा I सज्जन आदमी ने 1 किलो भिंडी लिया I उसने सब्जीवाले को 20 रुपए दिया I लेकिन सब्जीवाले 30 रुपए मांग रहा था I सज्जन आदमी एक रुपया ज्यादा देने के मूड में नहीं था I दोनों में बहस होने लगी I सज्जन आदमी का तर्क था कि कल हम बाजार से 20 रुपए किलो भिंडी लाये थे I आज तुम हमसे 30 रुपए मांग रहे हो I यह गलत हैं I सब्जीवाले का तर्क था कि सब्जी का भाव रोज बदलते रहता है I आज हमने मंडी से ही 20 रुपए किलो खरीदे है तो बिना फायदा के हम कैसे दे सकते हैं I हमारे भी बच्चे हैं I हमें भी घर चलाना पड़ता है I दो पैसे नहीं कमाए तो फिर सब्जी बेचने का क्या फायदा ? वहाँ पर बहुत से लोग जमा हो गए I 

		सज्जन आदमी गाली बकते हुये अपने घर की ओर प्रस्थान कर गया I पीछे-पीछे सब्जीवाला भी चल दिया I सज्जन आदमी ने अपने घर के अंदर जाकर मुख्य द्वार बंद कर दिया I सब्जीवाला वहाँ पहुँचकर  मुख द्वार पर 20 रुपए रख दिया और वापस अपने सब्जी के पास आ गया I
 
		वहाँ जितने  आदमी उपस्थित थे उतने बाते हो रही थी I लेकिन सभी इससे सहमत थे की सब्जीवाले की कोई गलती नहीं हैं I जब बाजार में भिंडी के दाम ऊपर चला गया तो सब्जीवाले का क्या दोष हो सकता हैं ? बड़े आदमी की सोच ही गलत होती है I वह गरीब आदमी की कभी इजज्त नहीं करता हैं I धीरे-धीरे सभी लोग अपने अपने घर चला गया I 

		शाम में राम सब्जी लाने बाजार गया था I वह भिंडी का दाम अनेक दुकानदार से पूछा सबने भिंडी का दाम 30 रुपए ही बताया I राम को सुबह वाली बात याद आ गया I उसे आज एहसास हुआ की गरीब आदमी को कोई इज्जत नहीं करता है I बाजार में जब भिंडी का दाम 30 रुपए है तो वह सब्जीवाला तो उसके घर जाकर सब्जी दे रहा था फिर भी 30 रुपए किलो ही दे रहा था I अमीर आदमी इतने कंजूस होते है आज हमें पता चला I गरीब आदमी का स्वाभिमान बहुत होता हैं I उसने उस सज्जन आदमी को भिंडी भी दे दिया और पैसा भी नहीं लिया I 

लेखक : नागमणि कुमार सिंह 
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