नीतू सिंह वसुंधरा 19 Sep 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत Nitu singh Hindi Kavita 77921 0 Hindi :: हिंदी
बचपन का साथी बचपन का साथी कब राहों में खो गया, यह पता चला ही नही। मैं बच्चा से कब बड़ा हो गया ये पता चला ही नहीं। बचपन के वो लम्हे जो हर समय जी में आए। मगर चाह कर भी दिन कभी लौट के ना आए। बचपन में न सोच थी, न एहसास था। लेकिन दोस्तों के साथ मर मिटने का प्यार था। बचपन की दोस्ती कब जज्बातों में बदल गई, इसका एहसास ही ना था। और जज्बात कब जिंदगी में बदल गई इसका एहसास ही ना था। एक पल के लिए तो दोस्ती से यकीन हीं उठ गया। एक ऐसा मोड़ आया कि हम सारे दोस्त सबके दुख में जीने मरने को तैयार हो गए। बचपन का वह समय जो हर पल याद आए। बचपन का साथी कब राहोमें खो गया ये पता ही नहीं चला।