संदीप कुमार सिंह 25 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह मुक्तक कविता सामाजिक है. जिसमें मैंने बेटी का वर्णन किया है. कहा है की अगर बेटी माँ सीता समान हो तो परिवार स्वर्ग बन जाता है. और यह दुनिया भी और सुंदर हो जाती है. आशा है की आप पाठक लोगों मेरी यह मुक्तक कविता अवश्य पसंद आएगी. 1053 0 Hindi :: हिंदी
सरसी छंद मुक्तक मातु पिता तब धन्य लगे जब ,बेटी सिया समान l सदा निभा पति धर्म चले जो,बनती पति की आन l बने अमर इस भव्य जहां में,लेती नारी सीख = दिखे स्वर्ग घर बेटी से ही,दिखता दिव्य जहान ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....