Nisha Kumari 26 Jun 2026 कविताएँ समाजिक दोस्ती से अपनी शान 579 0 Hindi :: हिंदी
हम सहेलियां हैं चार हमें नहीं है किसी का डर आपस में है प्रेम की एक डोर साहस भी है हम में अपार।। जब भावनाएं करती हैं अनेकों प्रहार कभी जो डगमगाए अपना मन बार बार बन जाते है एक दूसरे का सहारा नहीं बिखरने देते किसी का अभिमान।। जीवन के सफर पर चलते रहे हम परायों जैसा कभी किया नहीं व्यवहार अपने अपने लक्ष्य को निरंतर है पाया अपनी सीख से है सबको लुभाया।। अपनी हर परिस्थिति को दिल खोल कर अपनाया है अपनी कुछ अलग पहचान सबकी है अपनी छवि है अपना आसमान।। हजारों सपने है हम सजाते मिलने की कोशिश में दूर तलक भी जाते फासलों ने कभी हमे डराया नहीं है अपना हुनर और जज्बा आपार।। जब कभी होता है मन उदास याद कर लेते है एक दूसरे को मन का भ्रम भी करते हैं दूर बढ़ाते है अपना मनोबल बार बार।। साथ बिताए पल भी है खास अपनी दोस्ती भी है बहुत लाज़वाब है यही अपनी कामना मिले हमे हरपल अपना यह साथ।। कभी पढ़ते थे साथ बैठकर रूठते भी थे कभी कभी पर जब आए कोई परेशानी हो जाते थे लड़ने को तैयार सभी।। है यही मेरी प्रार्थना नित्य करे विकास सभी हो कभी जो मन हताश ऐसे ही बनाए रखना अपना विश्वास।। है अपनी कुछ यादें पुरानी जमाने से बेगानी कुछ बिसरी कुछ पहचानी बनाए रखना अपनी अपनी पहचान और याद रहे ये दोस्ती है हमारी शान।। अपनी कथा कभी खत्म नहीं होगी है अपनी अभी बहुत कहानी दोस्ती में हमारी जान है बसती हम चारों की यही कहानी।।