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भरत तिवारी

संदीप कुमार सिंह 27 Jun 2026 कविताएँ देश-प्रेम मेरी यह मुक्तक कविता (भरत तिवारी) पर लिखी है. जो अभी-अभी चार-पांच रोज पहले बिहार पुलिस के द्वारा accounter में मारा गया है. जिसे पुलिस पागल बता रही है लेकिन सचमुच में वो कोई पागल नहीं था. वो एक क्रांतिकारी हम-सब के बीच आया हुआ न्याय का फ़रिश्ता था. 307 0 Hindi :: हिंदी

भरत तिवारी  मरकर भी ज़िन्दा  रहेगा  भारत  का अभिमान  रहेगा l
आजाद  भारत  के  इस  क्रान्तिकारी  पर   भारतीय  को  गुमान  रहेगा l
वो  पागल  नहीं  था हम सबों  के  बिच  आया  न्याय  का  फरिश्ता  था =
ऐसे  वीर जन से अतुल्य   भारत   में  युगों =युगों  तक  इंसान  रहेगा ll
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह*Author*

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