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रवि की प्रेम कहानी

Dharmpal Saroj 26 Jun 2026 कहानियाँ प्यार-महोब्बत प्यार और मोहब्बत प्रेम, प्रेम कहानी 803 0 Hindi :: हिंदी

रामपुर गांव में रवि नाम का एक लड़का रहता था वह अपने मम्मी पापा से अक्सर
कहता पापा मुझे पहाड़ों में घूमने बहुत पसंद है मुझे पहाड़ दिखाओ मैं देखना चाहता हूं बहुत करीब से उसके पिता ने कहा बेटा अभी तुम बहुत छोटे हो बड़े हो जाओ फिर तुम अपने आप पहाड़ों में घूम के आना धीरे-धीरे रवि की उम्र 18 साल से 22 साल तक की हो गई फिर उसने एक दिन विचार बनाया कि अब मैं पहाड़ों में घूमने जरूर जाऊंगा एक दिन अपनी मां से कहा मम्मी मुझे अब रहा नहीं जाता मैं अब पहाड़ों में घूमने जाऊंगा आप मुझे जाने की आशीर्वाद दें उसकी मम्मी ने कहा बेटा पापा से बात कर लो फिर चले जाना रवि ने अपने पिता का नंबर लगाया फोन से उसके पिता ऑफिस में थे और कहा पापा में पहाड़ों में घूमने जा रहा हूं और दो-चार दिन में वापस आ जाऊंगा  उसके पिता ने कहा ठीक है बेटा जाओ और अपने खाने-पीने का ध्यान रखना रवि ने कहा ठीक है रवि वहां से ऊटी के लिए रवाना हो गया चलते-चलते 24 घंटा लगते हैं उसको उटी,तक पहुंचने में शाम हो गई ऊटी के शहर में होटल में एक रूम लिया वही तीन से चार दिन के लिए शिफ्ट हो गया 
सुबह हुई तो उसने देखा कितना सुहाना मौसम ऊटी का चाय के बागान चारों तरफ हरे-भरे पहाड़ सुनहरी घटिया ऐसा लगता था उसको कि वह जन्नत में आ गया है उसका मन बहुत ही खुश था घूमते घूमते चाय के खेतों में पहुंच गया वहां मजदूर काम कर रहे थे कुछ लड़कियां भी थी और कुछ लड़के भी थे और कुछ बुजुर्ग लोग भी थे और बुजुर्ग महिलाएं भी थी ऐसे ही मजदूरों पर रवि गया और तुम मजदूरों से पूछा भाई कितने खुशनसीब हो तुम लोग कि यहां किसी जन्नत में रहते हो कितना सुहाना मौसम है यहां का चाय के बागान हरे-भरे पहाड़ मेरा तो मन ही नहीं करता लौटकर  के जाने को एक लड़की बोली की बाबू जी आप कहां से आए हो उसने कहा हमें बहुत ही दूर से आया हूं रामपुर से 24 घंटे मुझे यहां तक लगे आने में उसे लड़की ने कहा तो आप बहुत दूर से आए हो हां यहां जो आता है उसको अच्छा लगता और हमें भी यहां बहुत ही अच्छा लगता है 
और उन्होंने उन मजदूरों के भीड़ में एक चेहरा ऐसा देखा बहुत ही शांत सुशील और चंचल रवि ने देखा और देखते ही रहे बहुत देर तक देखते रहे उसको उसे लड़की का नाम था मधु मधु ने उनकी तरफ कोई भी ध्यान नहीं दिया बाकी सब मजदूर बातचीत कर रहे थे कुछ अपने कह रहे थे कुछ उनकी सुन रहे थे लेकिन मधु ने उनकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया बस अपना काम करती रही यही सादगी रवि को बहुत अच्छी लगी और रवि ने कहा की आप लोग इतनी मेहनत करते हो कितने पैसे आपको मिलते हैं एक दिन के एक बुजुर्ग आदमी ने कहा जिसका नाम था बनवारी लाल बाबूजी हमें₹15000 महीने का मिलता है यानी कि एक दिन का ₹500 रवि ने कहा यह तो मजदूरी आपकी बहुत ही काम है कम से कम 20 से ₹25000 एक महीने की सैलरी होनी चाहिए एक मजदूर की तब फिर इस आदमी ने कहा नहीं बाबूजी हमें कोई नहीं देता हर महीने बोलते हैं अब इस बार में पगार बढ़ा देंगे लेकिन कोई बढ़कर नहीं देता रवि ने कहा चलो ठीक है मैं आपकी बात करूंगा आपके मैनेजर से लोगों ने कहा ठीक है बाबूजी रवि वहां सेचले आते हैं कमरे पर बहुत सारी रात मधु के बारे में सोचते रहते हैं उनको मधु से प्यार हो जाता है और वह सोचते हैं कि मैं शादी करूंगा तो बस बंधु से वरना जिंदगी भर किसी से शादी नहीं करूंगा दूसरे दिन वह वहां फिर जाते हैं जाते ही जाते उनकी नजर मधु,को ढूंढने लगती हैं लेकिन मधु काफी देर बाद आई जब तक वह मजदूरों से बातचीत कर रहे थे उनकी नजर मधु पर पहुंच गई और वह फिर से देखना चालू हो गए मधु ने सोचा कि यह लड़का तो पीछे ही पड़ता जा रहा है लगता है कुछ करना पड़ेगा 
धीरे-धीरे रवि मधु के पास पहुंच गया फिर उसने मधुर से कहा क्या नाम है तुम्हारा और मैं दो दिनों से देख रहा हूं तुम किसी से बोलती नहीं और अपना काम करती रहती हो बाकी लोग मजदूर सब हंसते बोलते हैं बातें करते हैं और काम भी करते हैं तुम क्यों किसी से नहीं बोलती मधु ने कहा मैं भी आपको दो दिन से बहुत देख रही हूं आप मेरी तरफ क्यों देखते हो इतना आपको क्या करना है मेरा नाम से मुझे तो आपसे कोई मतलब नहीं आप मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए जाइए आप यहां से रवि ने कहा इतना गुस्सा क्यों करती हो मुझे आपकी शादी की बहुत अच्छी लगी मैं बहुत प्यार करने लगा हूं आपसे अगर आपको ऐतराज ना हो तो मैं कुछ मिनट आपसे बात कर सकता हूं मधु ने कहा मैं तुमसे कोई बात नहीं करना चाहती मैं जानते तक नहीं तुम्हें और प्यार फिर कैसे कर लूं आपसे इतनी बात कह कर मधु दूर चली जाती है रवि फिर अपने कमरे पर वापस आ जाते हैं एक फिर  तीसरे दिन जाते हैं और दूसरी लड़की को पास में बुलाकर उससे पूछते हैं कि मैं मधु से बहुत प्यार करता हूं आप उसके बारे में मुझे बताइए वह मुझसे बात करना नहीं चाहती उसे लड़की ने कहा कि उसकी मां की तबीयत बहुत खराब रहती है इसीलिए जितना वह काम आती है आपकी मां के इलाज में खर्च कर देती है और इसीलिए उसका दिमाग ठीक नहीं रहता सोचती रहती है अपनी मां के बारे में उसका पिता नहीं है एक भाई है छोटा भाई को पड़ता है और मां की इलाज करवाती है खुद की पढ़ाई नहीं कि उसने 
तब रवि ने कहा कि मैं शादी तो इसी से करूंगा वरना किसी से नहीं उसे लड़की से कहा मुझे उसका घर तक पहुंचा दो उसे लड़की ने कहा शाम को आप मेरे साथ में चलना मैं आपको इशारे से उसका घर बता दूंगी फिर उसने कहा की शाम को नहीं शाम को तो मधु ड्यूटी से पहुंच जाएगी मैं अभी जाना चाहता हूं उनकी मां के पास फिर उसे लड़की ने कागज पर मधु का एड्रेस लिख कर दे दिया और रवि लोगों से पूछते पूछते मधु के घर पर पहुंच गया 
उसका छोटा भाई राज पढ़ने गया था और मां थी घर पर रवि ने जोर से आवाज दी क्या घर पर कोई है उसकी मां बोली की हां कौन है बाहर मैं अभी आता हूं 
माउस की बहार आई मधु की मां का नाम कौशल्या देवी था कौशल्या देवी बहराइच और देखा कि बाहर कोई लड़का खड़ा है तो उसने पूछा बेटा कौन हो तुम और कहां से आए हो और यहां किस काम से आए हो रवि ने अपनी सारी बात कौशल्या देवी को बताएं तब कौशल्या देवी रवि की बात पर सहमत हो गई और रवि से कहा बेटा मैं तो मान जाऊंगी लेकिन तुम्हारे मम्मी पापा तो बहुत पैसे वाले हैं क्या वह हम गरीब से रिश्ता बनाएंगे रवि ने कहा मुझे पैसों से कोई मतलब नहीं अगर मेरे मम्मी डैडी अगर मुझे मना करेंगे तो मैं यही आपके साथ रहूंगा कौशल्या देवी कौशल्या देवी ने कहा ठीक है बेटा अब तुम जो मैं मधु से बात करके तुम्हें बताऊंगी कल तुम फिर आना इसी टाइम पर मधु शाम को आएगी 
उससे पूछ कर मैं तुम्हें बता दूंगी रवि वहां से चले आते हैं उधर मधु घर पर अपने आती है हाथ मुंह धो कर रोटी खाने जाती है तभी उसकी मां कहती है बेटी कैसा रहा काम तुम्हारा मन में कहा ठीक था मम्मी तब कौशल्या देवी पूछता है बेटा तुमसे कोई बात मगर पूछूं तो बुरा तो नहीं मानोगी तब मधु ने कहा नहीं मां मैं क्यों बुरा मानूंगी कहिए क्या बात है तब कौशल्या देवी ने मधु को सारी बात बताई तब मन होने कहा ठीक है मां जैसे तुम्हारी मर्जी मैं तुम्हारी बात नहीं तालूंगी लेकिन मैं बोल बहुत पैसे वाले हैं क्या यह रिश्ता उनको स्वीकार होगा  कौशल्या देवी ने कहा बेटा रवि तो कह रहा था अगर उसके मां-बाप यह रिश्ता स्वीकार नहीं करेंगे तो वह हमारे साथ रहकर जिंदगी बताया बंद होने का ठीक है मां जैसा तुम ठीक समझो 
रवि ने फोन पर अपने मम्मी पापा से बात की और उनको तुरंत बुला लिया वह लोग आए दो गाड़ियां हैं उनके पास और माधुरी के सामने मोहरे पर गाड़ियां खड़ी कर दी और अंदर आ गए साथ रवि भी आया 
रवि के पिताजी ने कहा की आपको कोई परेशानी नहीं होगी आपका इलाज हम करवाएंगे और हमारे बेटे को आपकी बेटी पसंद है तो आप शादी कर दीजिए हम आप सभी लोगों को लेने आए हैं आपके बेटे की पढ़ाई हम करेंगे आपके दवाई भी करवा देंगे हम एक बार आप हां बोल दिए मधु की मां ने तुरंत हां बोल दी और इस वक्त कन्यादान कर दिया और विदा कर दिया मधु को और कहा बेटा तुम जाओ जब तक हम दो-चार दिन यहां रहेंगे फिर वही चले आएंगे रवि ने कहा हां मधु दो-चार दिन में में मम्मी और तुम्हारे भाई को यहां से ले आऊंगा अभी अगर चलोगे तो सभी कहेंगे कि फिर साथ ही में सब लोग आ गए तीन से चार दिन बाद रवि मधु के भाई और उसी मन को वहां से रामपुर के लिए ले आया और उसकी मां का इलाज करवाया और एक अच्छे से स्कूल में मधु के भाई का एडमिशन करवा दिया और सभी लोग प्रेम से रहने लगे अगर दोस्तों यह कहानी आपको अच्छे लगे तो फॉलो जरूर करें और कमेंट करके जरूर बताएं और हां दोस्तों अगर हमारे किसी भी सिंगर भाई को अगर हिंदी गीत लिखवाने हैं तो हमें कमेंट में बोल सकते हैं थैंक यू दोस्तों आपका दिन शुभ हो राइटर धर्मपाल सरोज

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