Bholenath sharma 05 Feb 2024 कविताएँ समाजिक ऋतु बसन्त 45602 0 Hindi :: हिंदी
चली रही है तेज हवाएं आई ऋतु बसन्त की ।
गिर रहें भू में तरू पल्लव आई ऋतु बसन्त की ।
नव पल्लव आ गये विटप के वृंत पर ।
खेतो में सरसों के फूलो पर
गूंज रहै है मधु के स्वर ।
खेतो की मेढ़ी पर चलते
सुनो इनके गुनगाते स्वर ।