Rambriksh Bahadurpuri 16 Aug 2026 कविताएँ समाजिक #पक्षियों पर कविता हे! मानव#मानवता पर कविता से! मानव#कवि रामवृक्ष बहादुरपुरी की कविता से! मानव#अम्बेडकर नगर पोइट्री साहित्यिक मंच#सामाजिक कविता 853 0 Hindi :: हिंदी
हे! मानव हे! मानव तुमने हमको पाला पोसा पेड़ लगाया दाना खिलाया परिवार का एक अंग बनाया, हमें गर्व था हम इंसानों के बीच में हैं तुम्हें देखते ही पेड़ों से आकर दाना चुगते और अपने कलरव से आंगन सजाते। किसे पता था! लगाए गये पेड़ काट लोगे खिड़कियां दरवाजे बंद कर लोगे हमें बेघर कर दोगे फिर पलट कर न देखोगे, हम तो आज भी आते हैं उड़ते हुए लौट जाते हैं चिलचिलाती आंगन के धूप सूना आंगन आप को अच्छा लगता है पर मुझे नहीं। रामवृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...