SHUBHAM PATHAK 25 Aug 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत 306 0 Hindi :: हिंदी
मुझे प्यार जताना नहीं आता मुझे प्यार जताना नहीं आता, मगर जितना तुझसे है, उतना तो खुद से भी नहीं... मैं अक्सर खामोश रहता हूँ, हर बात पर तेरा नाम नहीं लेता, तुझसे हर पल बात नहीं करता, हर एहसास को शब्दों में नहीं कहता, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि मेरे दिल में तेरी जगह कम है। सच तो ये है कि मेरी हर खामोशी के पीछे तू है, मेरी हर मुस्कान में तू है, मेरी हर दुआ में तू है, और मेरी हर उस ख्वाहिश में भी तू है जिसे मैंने कभी किसी से कहा तक नहीं। मुझे नहीं आता तेरे लिए बड़े-बड़े वादे करना, चाँद-सितारे तोड़कर लाने की बातें करना, हर रोज़ तुझे ये बताना कि मैं तुझसे कितना प्यार करता हूँ... मुझे बस इतना आता है कि जब तू उदास हो, तो बिना पूछे तेरी उदासी समझ लूँ। जब तू चुप हो जाए, तो तेरी खामोशी पढ़ लूँ। जब दुनिया तुझे गलत समझे, तो बिना किसी सवाल के तेरे साथ खड़ा रहूँ। और जब तू खुद से हारने लगे, तो तुझे तेरा ही हौसला याद दिला दूँ। कभी-कभी तू शिकायत करती है कि मैं पहले जैसा नहीं रहा, पहले जितना वक्त नहीं देता, पहले जितना प्यार नहीं जताता... काश तू मेरे दिल के अंदर देख पाती, तो तुझे पता चलता— वक्त कम हुआ है, मोहब्बत नहीं। बातें कम हुई हैं, तेरी फिक्र नहीं। मुलाकातें कम हुई हैं, तेरी यादें नहीं। मैं शायद पहले की तरह हर बात पर तुझे रोक नहीं पाता, हर पल तुझे अपना नहीं कह पाता, मगर आज भी तेरी एक परेशानी मेरी सौ खुशियों पर भारी पड़ती है। तू मेरे लिए सिर्फ मोहब्बत नहीं, मेरी आदत भी है, मेरी जरूरत भी है, मेरी कमजोरी भी है, और मेरी सबसे बड़ी ताकत भी। तुझसे मिलने के बाद मुझे समझ आया कि किसी इंसान का होना कितना जरूरी हो सकता है। तेरी आवाज़ सुनकर दिन अच्छा लगने लगता है, तेरी एक मुस्कान मेरी सारी थकान मिटा देती है, और तेरी नाराज़गी... वो आज भी मुझे अंदर तक तोड़ देती है। मैं तुझसे हर रोज़ प्यार का इज़हार नहीं कर सकता, लेकिन हर रोज़ तुझे खोने से डरता हूँ। मैं हर पल तेरा हाथ अपने हाथ में नहीं रख सकता, लेकिन हर मुश्किल में तेरे साथ खड़ा रहना चाहता हूँ। मैं तुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ें शायद न दे पाऊँ, लेकिन अपनी दुनिया में सबसे खूबसूरत जगह हमेशा तुझे ही दूँगा। अगर कभी मेरी खामोशी तुझे बेरुखी लगे, तो मेरी आँखों में देख लेना... अगर कभी मेरी दूरी तुझे बेवफाई लगे, तो मेरी धड़कनों को सुन लेना... अगर कभी लगे कि मेरा प्यार कम हो गया है, तो बस एक बार मुझे याद कर लेना... तुझे एहसास होगा कि मैं आज भी वहीं हूँ, जहाँ पहली बार तुझे चाहा था। बस फर्क इतना है कि तब मैं तुझे पाने की दुआ करता था, और अब हर रोज़ तुझे जिंदगी भर अपने पास रखने की दुआ करता हूँ। मुझे सच में प्यार जताना नहीं आता... मगर इतना जरूर जानता हूँ— तू मेरी जिंदगी में वो हिस्सा है, जिसे मैं खुद से अलग सोच भी नहीं सकता। और शायद इसीलिए मैं तुझे जितना प्यार करता हूँ, उतना खुद को भी नहीं... क्योंकि खुद के बिना शायद मैं जी सकता हूँ, लेकिन तेरे बिना जीने का ख्याल भी मेरी साँसों को भारी कर देता है। ✍️✍️ शुभम पाठक ✍️✍️