नागमणि कुमार सिंह 25 Aug 2026 कहानियाँ समाजिक आँसू 1407 0 Hindi :: हिंदी
कहानी आंसू छठ पूजा आने ही वाला था I अभय ने अपने घर पर माँ से छठ पूजा की तैयारी का जायजा फोन पर ले रहा था I कौन सा समान आया कौन सा समान नहीं आया, कौन लोग को निमंत्रण देना हैं और कौन लोग कब आएगे इसकी जानकारी ले रहा था I माँ ने सारी जानकारी फोन पर ही दे दी और यह भी पूछ लिया कि तुम घर कब आ रहे हो I अभय ने घर आने की सारी जानकारी दे दी और नियत समय पर परिवार के साथ घर पहुँच गया I अभी घर पहुँचकर बैठा ही था कि उसका भतीजा और भतीजी घर में दाखिल हुई I अभय आश्चर्य में पड़ गया क्योकि माँ ने फोन पर इस बारे में जानकारी नहीं दी थी I अभय ने अपने भतीजा और भतीजी से आने कि वजह और कब जाएगा के बारे में पूछ लिया I उसके जबाब में भतीजा ने कहा मैं दुर्गा दीदी को छठ पूजा में शामिल होने यहाँ छोड़ने आया हूँ और मैं आज ही पटना वापस चला जाऊंगा I अभय को माँ कि इस जानकारी को छुपाना बिल्कुल अच्छा नहीं लगा I वह कुछ देर आराम करने के बाद माँ के साथ छठ पूजा का सामान लेने बाज़ार निकल गया I रास्ते में वह इस बात पर बार-बार सोचता रहा और माँ से पूछता रहा कि क्यों दुर्गा के आने कि जानकारी हमे नहीं दी I माँ ने सफाई मे कहा कि कुछ दिन पहले दुर्गा की माँ ने फोन पर छठ पूजा में शामिल होने का आग्रह किया था I मैंने हाँ कर दी लेकिन तुम्हें बताना भूल गया I अभय अतीत मे खो गया कि कैसे अब लोग किसी उत्सव में शामिल होने के लिए तरसते हैं I एक समय था जब अभय 12 वी क्लास का बोर्ड की परीक्षा की तैयारी कर रहा था I तब उसके बड़े भाई ने माता-पिता से झगड़ा कर अपनी जमीन, जायदाद और चूल्हा अलग कर लिए थे I उस समय घर की पूरी ज़िम्मेदारी अभय पर आ गया था I अभय ने किसी तरह 12 वी की परीक्षा दी और प्रथम श्रेणी में पास हो गया I उस साल फसल अच्छी हुई थी तो अभय के बड़े भाई को परिवार के संख्या के हिसाब से ज्यादा हिस्सा मिला था I बड़े भाई के परिवार में पाँच सदस्य थे तो दूसरी तरफ अभय के परिवार मे माता-पिता और छोटा भाई कुल मिलाकर चार सदस्य थे I बड़े भाई ने अपना अलग व्यवसाय शुरू किए और अपना सारा संबंध अभय के परिवार से तोड़ लिए I अभय भी अपने बड़े भाई से इतना नाराज हुआ कि भविष्य में उससे कोई संबंध नहीं रखने की कसम खाई I उसके बड़े भाई का चरित्र अच्छा नहीं था I किसी रिश्तेदार और दोस्त से पैसा लेना और उसको अटका के रखना उसका काम था I तरह-तरह के व्यापार करना, मन को स्थिर नहीं रखना, पैसों का लालच, खुद के बारे में ही सोचना इत्यादि कारणों से अभय के बड़े भाई समाज, परिवार, और रिश्तेदार से दूर होते चले गएI इधर अभय बिहारशरीफ़ मे पढ़ाई करते-करते नौकरी प्राप्त कर ली और शादी करके अलग शहर मे रहने लगा I छोटा भाई को भी बिहारशरीफ़ में रहने की व्यवस्था कर दिया था I अचानक से माँ ने अभय से कहा क्या सोच रहे हो, हमलोग बाज़ार पहुँच गए है I जल्दी से सामान की लिस्ट निकालो I अभय अब अतीत से वर्तमान में आया और सामान का लिस्ट माँ को थमा दियाI पूरा सामान खरीदकर माँ के साथ अभय घर वापस आ गया और आगे की योजना बनाने लगा I क्योकि उसे इस बार छठ पूजा के दौरान दो सत्यनारायण स्वामी की पूजा भी करना था इसलिए उसने बहुत सारे रिश्तेदार को अपने घर पर बुलाया था I उसका भतीजा जा चुका था और नए मेहमान का आगमन शुरू हो चुका था I छठ पूजा के समाप्त होने पर सत्यनारायण स्वामी जी का पूजा देवी स्थान और घर में होना था I अभय ने सारे रिश्तेदारों को बहुत अच्छे तरीके से आदर सत्कार किया I बहुत सारे रिश्तेदार आए थे I सभी रिश्तेदार बहुत खुशी-खुशी पूजा में हिस्सा ले रहे थे I सारे पूजा के विधि-विधान समय पर पूरा हो चुका था I धीरे-धीरे अब रिश्तेदार जाने लगे थे I अभय भी बहुत थका हुआ था क्योकि पूजा के दौरान बहुत सारा काम किया था I सारे रिश्तेदार के जाने के बाद अभय एक कमरे में आराम कर रहा था, तभी उसकी भतीजी दुर्गा उसके पास आया और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी I अभय को बहुत आश्चर्य हुआ और दुख भी हुआ I अभय ने रोने का कारण पूछा तो दुर्गा ने बताया कि उसे छठ पूजा और सत्यनारायण स्वामी की पूजा में बहुत आनंद आया लेकिन आँसू इस बात के निकल रहे है कि हम सपरिवार उत्सव में शामिल नहीं हो पाते हैं I हमे किसी भी परिवार से इस तरह का निमंत्रण भी नहीं मिलता हैं I -----------------------------------------------------------------------------