Laxmi Kumari 14 Aug 2026 कविताएँ समाजिक नारी पर अत्याचार 661 0 Hindi :: हिंदी
तेजी से बदलते इस दुनिया मे, हमारा क्या कोई मान नहीं। प्रतिदिन होता हमारा अपमान, क्या हम कोई इंसान नहीं।। कभी डायन, कभी चुड़ैल कहकर, करते हमे बेइज्जत और अपमानित। पाकर कभी अकेला हमें करते संग अशोभनीय वार्तवित।। कुदरत ने जो दिया रूप - रंग, क्या, उसमें हमारा दोष है। क्या कहकर उन्होंने यह ही भेजा, की जा अब से पुरुष ही तेरा बॉस हैं।।